जयराम रमेश संसद सदस्य महासचिव (संचार) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा जारी- वक्तव्य।
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दिल्ली 10 सितंबर 2026 केन्द्र सरकार ने हाल ही में छत्तीसगढ़ के जैव विविधता से भरपूर हरदेव वाराणसी इकोसिस्टम में तारा कॉल ब्लॉक की नीलामी की है इस नीलामी में विजेता कौन है इसे लेकर कोई रहस्य नहीं है यह CG Syn- Gas and chemicals limited नाम की कम्पनी है, जो Mudra Synenergy Ltd की पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडीयरी है वही मुद्रा साइन एनर्जी लिमिटेड खुद अदानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडीयरी है जो मोदी कारोबारी समूह के ताज का पत्थर है।
इस फैसले को निम्नलिखित तथ्यों की पृष्ठभूमि में देखा जाना चाहिए।
26 जुलाई 2016 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर मांग की थी की हड़ताल में अब किसी भी कॉल ब्लॉक आवंटन या नीलामी न की जाए।
* 16 जुलाई 2023 ko राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हालकनामा दाखिल कर स्पष्ट रूप से कहा था कि हसदेव अरण्य में किसी भी नई खदान के आवंटन या विकास के कोई आवश्यकता नहीं है
* 19 अक्टूबर 2023 को केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने तारा सहित 40 पोल ब्लॉक को नीलामी प्रक्रिया से प्रस्ताव में डिनोटिफाई कर दिया था।
पिछले 15 वर्षों में स्थानीय आदिवासी और अन्य समुदाय ग्राम सभा के प्रस्ताव जैन अभियानों धरनो और विरोध मर्चों जिम रायपुर तक निकल गया मार्च अभी शामिल है के जरिए अपने जंगलों और इन जंगलों पर निर्भर अपनी रोजमर्रा की आजीविका की सुरक्षा की मांग को लेकर लगातार संघर्ष कर रहे तारा कॉल ब्लॉक लगभग 5000 एकड़ क्षेत्र में फैला है जिसमें 4000 एकड़ से अधिक घना जंगल है कम्पनसेंटरी ऑफिस्टेशन- यानी जंगल काटे जाने के बदले कहीं और पेड़ लगाना अपने आप में एक ही बोगस विचार है, और इसकी कितनी भी कोशिश कर ली जाए इतने विशाल प्राकृतिक वन क्षेत्र के जानबूझकर किया जा रहे विनाश की भरपाई कभी नहीं हो सकती इसके लिए 10 लाख से अधिक पेड़ों को पूरी तरह काट दिया जाएगा। लेमरू एलिफेंट रिजर्व के चारों ओर खनन होगी जिससे भारत के राष्ट्रीय धरोहर पशु हाथी के आवाज यही के रास्ते पर गंभीर असर पड़ेगा जबकि हाथियों की संख्या में कमी का संकट पहले से ही बना हुआ है कई अन्य प्रजातियों की इसमें और अधिक खतरे में पड़ जाएगी जिनमें से कुछ पहले से ही गंभीर रूप से संकटग्रस्त है।
लेमरू हाथी अभ्यारण्य भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरबा जिले में स्थित एक संरक्षित क्षेत्र है , जिसे जंगली हाथियों के लिए स्थायी आवास प्रदान करने और मानव-पशु संघर्ष को कम करने के लिए बनाया गया है।
मानव-हाथी संघर्ष को रोकना, संपत्ति और फसलों की रक्षा करना और ओडिशा और झारखंड से पलायन करने वाले हाथियों के लिए एक सुरक्षित आवास प्रदान करना
कॉरिडोर कनेक्शन: यह तीन महत्वपूर्ण हाथी आवासों को जोड़ता है: लेमरू (कोरबा), बादलखोल (जशपुर), और तमोरपिंगला (सरगुजा)।
Guddu Lahare
Raipur chhatisgarh
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